सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
-
मां पर इतने सुंदर सुंदर बोल...एकसाथ... *गिनती नही आती मेरी माँ को यारों,* *मैं एक रोटी मांगता हूँ वो हमेशा दो ही लेकर आती ...
-
*मुन्सी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता* _ख्वाहिश नहीं मुझे_ _मशहूर होने की, _आप मुझे पहचानते हो_ _बस इतना ही ...
-
जो कुल्फी खाते हुए एक हथेली कुल्फी के नीचे लगाये रहते हो ना इसे ही गीता में श्रीकृष्ण ने "मोह" बताया है. 😂😂😜😜😜 ...

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
Please Do not Enter Any Spam Link in the Comment Box.
कृपया कमेंट बॉक्स में कोई स्पैम लिंक न डालें।